भारत के पहले लोकपाल बने जस्टिस पीसी घोष !

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 19 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट  के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को भारत का पहला लोकपाल नियुक्त किया.पूर्व मुख्य न्यायाधीश अभिलाषा कुमारी, दिलीप भोसले, प्रदीप कुमार मोहंती और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी   भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल में न्यायिक सदस्य के रूप में चुने गए हैं. राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की पहली महिला प्रमुख अर्चना रामासुंदरम, पूर्व आईआरएस अधिकारी महेंद्र सिंह, गुजरात कैडर के पूर्व एएस अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन निकाय के गैर-न्यायिक सदस्य चुने गए हैं.

  

इन नियुक्तियों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति द्वारा की गई थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसे मंजूरी दी. इसकी चयन समिति में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई और प्रख्यात (प्रसिद्ध ) कानूनविद् मुकुल रोहतगी आदि सदस्य शामिल है. बता दे कि जस्टिस पीसी घोष वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से सेवानिवृत्त हुए. वो  29 जून, 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य हैं.

 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत कुछ श्रेणियों के सरकारी सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिये केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति करने का प्रावधान है. यह कानून 2013 में बना था. वर्तमान में हुई ये नियुक्तियां 7 मार्च को उच्चतम न्यायालय के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से 10 दिन के भीतर लोकपाल चयन समिति की बैठक की संभावित तारीख के बारे में सूचित करने को कहने के एक पखवाड़े बाद हुई हैं. न्यायालय के इस आदेश के बाद 15 मार्च को चयन समिति की बैठक हुई थी.पारित नियमों के मुताबिकलोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य हो सकते हैं. इनमें सेन्यायिक सदस्य होने चाहिए. इनमें से कम से कम 50 फीसदी सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिए.

 

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने लोकपाल नियुक्ति में देरी के विरोध में आंदोलन का एक और दौर शुरू किया था, जिसके बाद केंद्र सरकार की ओर से लोकपाल के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. समाजसेवी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपना आन्दोलन केंद्र सरकार के इस वादे के बाद समाप्त किया था कि बहुत जल्द लोकपाल की नियुक्ति किया जाएगा.