संडे के पीछे का इतिहास जानकर रह जाएंगें हैरान

रविवार का इंतेजार किसे नहीं होता, 6 दिन काम करने के बाद रविवार का अपना एक अलग ही मज़ा है. यही तो वो खुशनुमा दिन है, जिसका हमें बेसब्री से इंतजार करते हुए अलग-अलग योजनाएं बनाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर रविवार को ही छुट्टी क्यों मिलती है?  इसके पीछे का इतिहास क्या है और यह सब कयों शुरू हुआ. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि रविवार को छुट्टी क्यों दी जाती है.

दरअसल रविवार के दिन छुट्टी होने के एक नहीं अनेक कारण हैं. सबसे  पहला तो यह कि  अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO  के मुताबिक रविवार को ही सप्ताह का आखिरी दिन मानते हुए, छुट्टी की सिफारिश की गई है. वैसे इस बात को सबसे पहले 1986 में ब्रिटिशर्स से मान्यता मिली थी और क्योंकि भारत पर एक लंबे समय तक उनका अधिकार रहा इस कारण यहां भी रविवार की दिन छुट्टी दी जाने लगी.

मजदूरों की वजह से मिली रविवार की छुट्टी

रविवार के दिन अगर हमारे यहां छुट्टी होती है, तो उसका एक कारण मजदूर वर्ग भी है. बता दें कि अंग्रेजों के अपने शासनकाल में भारत में मजदूरों का खूब शोषण करते हुए सातों दिन ताबड़तोड़ काम करवाया. उस समय मजदूरों को खाना-पीने एवं बिना आराम के काम करना पड़ता था, जिस कारण वो बीमार होने लगे और एक बड़ा जनआंदोलन 1857 ई. में नेता मेघाजी लोखंडे के नेतृत्व में हुआ. इस आंदोलन के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने रविवार के दिन सबके लिए छुट्टी घोषित कर दी.

धार्मिक कारण

इस दिन को कई धार्मिक मान्यताओं के कारण भी छुट्टी होती है, जैसे रविवार के दिन हिंदू धर्म में सूर्य का दिन यानि लोक कल्याण का दिन माना जाता है. वहीं ईसाई संपद्राय में ईश्वर ने 6 काम करने के बाद सातवें दिन आराम किया था.